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The story of DM Dr. Nilesh Ramchandra Deore is an inspiration for every people

DM Dr. Nilesh Ramchandra Deore: वर्तमान मधुबनी के जिलाधिकारी डॉ निलेश रामचंद्र देवरे ने अपने 31 साल के उम्र में जो मुकाम हासिल किया है वो छात्रो के लिए प्रेरणादायक है।

हालाँकि चिकित्सा को सामाजिक सेवा का सबसे अच्छा साधन कहा जाता है, लेकिन IAS की सेवा में, सामाजिक सेवा के साथ-साथ, सामाजिक सुधार के लिए भी एक अवसर है।

इनमें से कुछ विचारों के साथ, डॉ निलेश रामचंद्र देवरे सर ने MBBS करने के बाद भी प्रशासनिक सेवा में अपना करियर चुना।

वह बिहार के कुछ ऐसे जिलाधिकारियों में से एक हैं, जहां भी वे तैनात थे, अपनी क्षमता और समर्पण से अपनी छवि बदलने की कोशिश की। जो लोग उन्हें जानते हैं, वे अक्सर जिले के बिगड़ते स्वास्थ्य को सुधारने के लिए उन्हें डॉक्टर कहते हैं।

डॉ नीलेश रामचंद्र देवरे सर, 2011 बैच के आईएएस अधिकारी महाराष्ट्र के नासिक जिले के निवासी हैं और अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए एक आदर्श हैं।

Nilesh Deore

उनके पिता आरडी देवारे जूनियर कॉलेज में प्रिंसिपल हैं जबकि उनके बड़े भाई डॉक्टर हैं। परिवार में शिक्षा एक प्राथमिकता रही है और उनके पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें।

वह बचपन से ही तेज थे, और महाराष्ट्र बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में बैच का टॉपर भी थे। उन्होंने तिराना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मुंबई से एमबीबीएस किया।

उनकी इंटर्नशिप के दौरान की एक घटना ने उन्हें IAS बनने के लिए प्रेरित किया। इंटर्नशिप के समय, सबसे कम उम्र के नीलेश को सबसे बड़ा पोस्ट CMO लगता था।

लेकिन, एक दिन जब नगर आयुक्त ने अस्पताल का दौरा किया, तो अस्पताल के सभी वरिष्ठ डॉक्टर उनके पीछे दौड़ते हुए दिखाई दिए।

आयुक्त ने एक आदेश के साथ अस्पताल के कई विकृतियों को ठीक किया। यह सब देखकर, नीलेश सर ने फैसला किया कि वह प्रशासनिक सेवा में आने के लिए कड़ा संघर्ष करेंगे।

2011 में IAS बनने और बिहार कैडर पाने के बाद, वे शुरू में पटना जिले के बाढ़ उपखंड में SDM थे। इसके बाद, वह गया नगर निगम के नगर आयुक्त बने।

उन्होंने प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में जो व्यवस्था की, वह काबिले तारीफ थी। उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया था।

जब Bettiah में पोस्टिंग हुई, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मेधा दिवस के अवसर पर स्वच्छ परीक्षा देने के लिए सम्मानित किये गए थे।

Nilesh Ramchandra Deore को भीड़ से अलग रखने की चाहत ने उन्हें IAS बना दिया।

हालांकि इससे पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ एमबीबीएस की फिर महज तीन माह की तैयारी के बाद आइएएस की परीक्षा पास की।

DM Dr Nilesh Ramchandra जी की ये कहानी न सिर्फ तैयारी करने वाले छात्रों को प्रेरित करने वाली है, बल्कि उन छात्रों के लिये सिख भी हैं। जो कुछ अलग करना चाहते है।

डीएम डॉ Nilesh Ramchandra जी का मानना है कि आगे बढ़ने के साथ साथ माता-पिता व बड़ो का का सम्मान करना जरूरी है।

इजारत के लिए माया, इमारत के लिए पाया और आगे बढ़ने के लिए बड़ो का साया बहुत ही जरूरी हैं।

महाराष्ट्र मैट्रिक बोर्ड के टॉपर रहे डीएम डॉ Nilesh Ramchandra जी की हौसले का उस समय परवान चढ़ा, जब टॉपर बनने के बाद उन्हें डीएम के हाथों सम्मानित होने का अवसर मिला।

ईसके बाद डॉ नीलेश जी ने कभी पीछे मुड़ कर नही देखा। हालांकि मैट्रिक टॉपर की खुमारी इनपर इस कदर हावी हुई, कि इंटरमीडिएट में इनके नंबर कम आ गये।

बकौल डीएम वह इंजीनियरिंग करना चाहते थे, लेकिन इनके पिता श्री आरडी देवरे परिवार के अन्य लड़को के तरह उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे।

लेकिन इंटरमीडिएट में कम नंबर होने के वजह से उन्हें सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला नही मिल सका। फिर इन्होंने अपनी माँ से पैसे लेकर पुणे के एक इंजिनीरिंग कॉलेज में दाखिला ले लिया।

लेकिन वहाँ ट्रेंड और फिर कॉलेज में इंजीनियर बनने के लिए हज़ारो की भीड़ देखने पर डीएम ने उनसे अलग होने का इरादा किया। फिर उन्होंने एमबीबीएस में एडमिशन ले लिया।

DM Nilesh Deore

DM Dr. Nilesh Ramchandra सर ने बताया कि एमबीबीएस की तीन साल को पढ़ाई करने के बाद अपने इंटर्नशिप के दौरान उन्होंने वहां के अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी को ही सबसे बड़ा अधिकारी माना।

कारण की वो 9 बजे से थोड़ा भी लेट होने पर हाज़री काट देते थे, और खरी-खोटी भी सुनाते थे। लगता था कि उनसे बड़ा कोई नहीं हैं।

लेकिन इसी बीच एक दिन उन्होंने देखा कि नगर आयुक्त (आईएएस अधिकारी) दौरे पर आए थे, और चिकित्सा पदाधिकारी उनके पीछे-पीछे दौड़ रहे थे। तब उन्होंने आईएएस बनने का मन बना लिया।

Nilesh Ramchandra Deore Sir की एक किस्सा मैं आप सभी को बताता हूँ

नीलेश सर ने 2009 में आईपीएल के दौरान, उन्होंने एक प्रतियोगिता में एक करोड़ का घर जीता। गोदरेज कंपनी के अध्यक्ष द्वारा उन्हें फ्लैट की चाबी सौंप दी गई थी।

लेकिन एक बार जब उन्होंने उस घर में प्रवेश करने के लिए तैयार हो गए तो उनसे मिलने का फैसला किया। इस बीच, उन्हें आयकर के 30 लाख रुपये भी जमा करने थे।

उसी समय, आर्थिक मंदी के कारण, घर की कीमत बहुत गिर गई, लेकिन कंपनी ने पुरानी कीमतों के आधार पर कर जमा करने के लिए उन पर दबाव डालना शुरू कर दिया।

सिर्फ 23 साल की उम्र में, उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया के साथ मिलकर कंपनी का इस्तेमाल करके लड़ाई जीती और बाद में कंपनी के चेयरमैन ने उनसे समझौता किया।

IAS Nilesh Deore Career

डॉ निलेश रामचंद्र देवरे सर ने बांका और पश्चिम चंपारण यानि की बेतिया की कमान संभाली है।

उनके कार्यकाल के दौरान, बांका में कांवरिया मेले में बुनियादी ढांचे का निर्माण, बोन्नी मंदार पर्वत की पर्यटन योजना, और मंदार पर्वत पर रोपवे का प्रारंभिक कार्य, साथ ही सरकार के सात धर्मों में निर्मित सभी संस्थानों को भूमि प्रदान करना।

31 जुलाई 2017 को जैसे ही वह पश्चिम चंपारण के डीएम बने, अगले कुछ दिनों में बाढ़ ने उनकी भयानक तबाही दिखाई। पीड़ितों के दर्द को अपने दर्द के रूप में लेते हुए, उन्होंने राहत के लिए दिन-रात काम किया।

उन्होंने बेतिया शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए एक अभियान का आयोजन कर लोगों के दिल में एक विशेष स्थान बनाया।

सोशल मीडिया का अच्छी तरह से इस्तेमाल करने वाले इस युवा अधिकारी का स्वभाव जरूरतमंदों के प्रति चिंतित होना है।

कलेक्ट्रेट नामक एक पेज बनाकर उन्होंने प्रशासन की हर जनकल्याणकारी योजना की घोषणा की और स्थानीय लोगों की समस्याओं को भी सुनकर उनका निवारण किया।

यह प्रयोग पश्चिमी चंपारण में पहली बार हुआ और काफी सफल रहा।

डॉ नीलेश रामचंद्र देवरे को नौकरशाही में सिर्फ 09 साल का अनुभव है, लेकिन उनके कार्यों और परिपक्वता के फैसलों की हर जगह सराहना की जाती है।

प्रशासनिक ज़िम्मेदारी और आम लोगों के साथ भागीदारी ही उन्हें विशिष्ट बनाती है। वह वर्तमान में मधुबनी के कलेक्टर हैं।

झूठ की बुनियाद पर कुछ नही टिकता, मिली थी सीख

डीएम ने बताया कि एमबीबीएस के इंटर्नशिप के दौरान 2 माह के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुजरने होंते थे।

वो IAS बनने का मन बना चुके थे, और उनके दोस्त पीजी की तैयारी करने के लिए पीएचसी पर काम से बंक मारकर पढाई का निश्चय किए।

सेटिंग भी हो गयी थी, लेकिन उसी 16 दिसंबर के रात जब वो और इनके चार दोस्त इस झूठ से पहले पार्टी के लिए जा रहे थे। तभी एक्सीडेंट में घायल होकर 3 महीने हॉस्पिटल में गुजारे।

तब उन्होंने सबक सीखा कि हमेशा सच की बुनियाद पर ही आगे बढ़ने की कोशिश होनी चाहिए। झूठ के सहारे पर ज्यादा समय नहीं टिका जा सकता।

IAS Nilesh Deore

डीएम डॉ नीलेश जी ने बताया की तीन माह में तैयारी कर उन्हीने आइएएस की परीक्षा पास की, हालांकि इस बीच एक बार मे वो 24घण्टे की पढ़ाई करते थे।

उसके बाद 6 से 7 घण्टे की नींद लेते और फिर पढ़ने बैठ जाते, फिर अगले 24 घण्टे तक बिना खुद को किसी अन्य चीज में उलझाएं पढ़ाई करते थे।

24घण्टे में बस एक बार ही खाना खाते ताकि समय बचें, इस तरह उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में ही आईएएस की परीक्षा में सफलता पायी।

एक आम बेतिया के नागरिक की DM Nilesh Ramchandra जी के लिए सोच

डीएम डॉ नीलेश सर को 31जुलाई2017 को जिला पश्चिमी चम्पारण का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया।

2अगस्त से Nilesh Ramchandra सर ने अपना कार्यभारों को संभाला ही था कि अगस्त2017 शुरुआत में ही आई भयानक प्राक्रतिक बाढ़ इनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई,

लेकिन अपने निष्ठा एवं लोगो की दर्द को खुद का दर्द समझ दिन रात इन्होंने बाढ़ पीड़ितों के राहत के लिए कार्य किया।

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घटनास्थलों से लेकर राहत सामग्रीयों का इंतजाम एवं लोगो को सुरक्षित करने की हर मुमकिन कोशिस ने हम जिलावासियों के दिल मे अपनी एक स्तरात्मक छवि स्थापित कर लिए।

और उस दुःखद आपदा से अपने जिलेवासियों को बचाने के साथ साथ पूर्वी चम्पारण के लोगो के राहतसमाग्री के लिए भरपूर कोशिश की।

इस भारी आपदा से निकलने के बाद, अपने कड़े कड़े फैसलों से जिलेवासियों के दिल मे जगह बनाते गए।

जिसमे असमाजिक तत्वो पर नकेल कसने से लेकर आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर प्रशासनिक नजर रखवाने से ले, गन्दी गानों पर बैन, छेड़खानी करने वाले नवयुवकों पर कठोर सजा, दारूबाजो को पकड़ने का आदेश इत्यादि शामिल रहें।

और फिर इनका फिर से एक बड़ा कदम 29नवम्बर2017 को हुआ, जब आईटीआई में बसे हज़ारो अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए बुल्डोजर चहड़ायें (यकीन माने पहले को मैं इसके खिलाफ था लेकिन इसके कुछ दिनों बाद अहसास हुआ कि डीएम डॉ नीलेश सर ने जो भी किया वो हम बेतियावासियों के हित मे था)

फिर आईटीआई पर से अतिक्रमण हटाने के बाद वहाँ बुद्धा पार्क के तर्ज पर पार्क बनाने का उनकी घोषणा ने फिर से लोगो मे एक हर्ष का मौका दे दिया।

उसके बाद से तो बेतिया में अतिक्रमण कर रहने वालों के लिए तो जैसे प्रशासन का कहर ही बरसा, मीना बज़ार, हरिवाटिका चौक, कॉलेक्ट्रीट, सुप्रिया रोड़, इत्यादियों पर अतिक्रमणकारियों पर लगातार डीएम सर का डंडा चलता गया।

इधर ही कुछ महीने पहले डीएम सर, एमजेके हॉस्पिटल का निरीक्षण करने गए, मुख्य गेट पर 5मिनट जाम में फँसने के बाद, इन्हें स्थानीय लोगो की समस्या का अनुभव हुआ, उसके अगले ही दिन एमजेके हॉस्पिटल रोड़ पर बसे हर अतिक्रमणकारियों पर बुल्डोजर चला रास्ते को खाली करवाएं।

इसके कुछ दिनों बाद सागर पोखर पर बसे अतिक्रमणकारियों पर बुल्डोजर चला वहाँ वॉकिंग जोन स्थापित करने का आदेश दे दिए।

chhawni bettiah

फिर हाल में ही राज देवड़ी पर बसे अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन का डंडा चला और कल के ही दिन छावनी ओवरब्रिज बनने में सबसे बड़ी समस्या वहाँ के अतिक्रमणकारियों पर बुल्डोजर चहड़ा कर ब्रिज की एक बड़ी रोड़ा को साफ कर दिया।

इन सब के अलावा भी बेतिया एवं जिले में पर्यटकों को लुभाने हेतु अनेकों घोषणाएं एवं स्वीकृति भी दिलाई.

इसके अलावे जिले को स्वच्छ बनाने में एवं खुले में शौच करने वालो पर लगाम लगाने के साथ ही बेतिया नगर परिषद एवं जिले शहर के मुख्य प्रतिनिधियों के कदम में कदम मिला शहर जिले के विकाश में भी इनका योगदान हमेशा से रहा। 

साथ सोशल मीडिया पर कॉलेक्ट्रीट नाम से पेज बना स्थानीय लोगो को हर चीज का जानकारी देने एवं स्थानीय लोगो के समस्याओं को सुन उनका निवारण करने का पहल करना पश्चिमी चम्पारण में पहली दफा हुआ हैं।

हर रोज बेतिया में घटित घटनाओं एवं कार्यो की झलक हम उनके पेज द्वारा देख पाते हैं।

बेतिया को अतिक्रमणमुक्त करने के लिए सारे शहरवासियों के तरफ से डॉ नीलेश सर को धन्यवाद

आने वाले कुछ सालों में बेतिया की खूबसूरती में डीएम डॉ नीलेश सर का एक अहम योगदान हम सभी को दिखता नजर आ रहा हैं।

इस एक साल में जिले के प्रत्येक लोगो के दिल मे हमारे जिले के DM Dr. Nilesh Ramchandra सर के लिए एक खास जगह बन चुकी हैं

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