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स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाता बेतिया नगर परषिद, केवल कागज़ पर दिखती हैं सफ़ाई/कार्य

केन्द्र और राज्य सरकारें लगातार चिंतित हैं कि निरंतर बढ़ रहे विविध प्रकार के प्रदूषण से कैसै निजात पाया जाय? वे इसे अमली जामा पहनाने के लिए कटिबद्ध हैं।  किस प्रकार समाज को स्वच्छ जल और वायु प्राप्त हो,ताकि उसकी जिन्दगी स्वस्थ और खुशहाल रह सके, इसके लिए तरह-तरह के अभियान सरकारी और गैरसरकारी दोनों ही सतर पर चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने स्वयं   बड़ी ही उम्मीद और विश्वास के साथ देशवासियों से इसकी अपील भी कर रखी है।

बेतिया शहर के संदर्भ में

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➧ दो-तीन वर्ष पहले तक नीचे की तस्वीरों वाला मार्ग  स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर सुबह-सुबह टहलने वालों का पसंदीदा मार्ग हुआ करता था। सामान्य जन से लेकर सरकारी पदाधिकारीगण भी इस मार्ग पर तड़के भोर चहलकदमी करते देखे जाते थे। यह रास्ता जिलापदाधिकारी के समीप से बरास्ता पुलिस लाइन हजारी पशु मेला होते हुए बेतिया प्रखंड कार्यालय के पास पुनः शहरी क्षेत्र से जुड़ जाता है। इस प्रकार यह शहर और ग्राम दोनों के बीच सामंजस्य बिठाता था। किन्तु देशभर में स्वच्छता अभियान की लहर क्या चली, बेतिया नगर परिषद और जिला प्रशासन ने बेतिया वासियों की वह सुविधा भी छीन ली । अब तो इस डेढ़-दो किलोमीटर के मार्ग में दर्जनों जगह शहर के कचरों और सड़े-गले अवशेषों का अंबार दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। अब सुबह टहलने वालों ने इस रास्ते को अलविदा कह दिया है।

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नीचे की तस्वीरें बेतिया नगर परिषद और जिलाप्रशासन के स्वच्छता मिशन की जीवित गवाह —

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ख़ैर हमलोग जमीनी मुद्दे की बातें करने लगे, कागज़ी मुद्दे और कागज़ों पर बेतिया बिहार के टॉप4 साफ़ सफाई वाला शहरों में शामिल हैं ही,..

सफाई के मामले में बेतिया हैं टॉप4 पायदान पर, फिर भी हैं खामिया..

हर सप्ताह कुछ ना कुछ ऐसा सुनने को आता हैं के बेतिया की सफाई हो ही जाएगी, हमेशा परिषद से कुछ न कुछ फरमान निकलते ही हैं। पर वो बस बातें भर और न्यूज़ में आ के ही रह जाता हैं, वास्तव से उसका कोई लेना देना ही नहीं होता। नगर परिषद का जमीनी स्तर से कोई वास्ता ही नहीं दिखता, हाल में ही सुनने को आया के बेतिया के हर वार्डों में मच्छर से छुटकारा के लिए फॉगिंग किया जाएगा। पर ना मेरे वार्ड में हुआ ना मेरे आसपास की वार्डों में जबकि पेपर में आया था के सारे 39वार्डों में फॉगिंग होगी ख़ैर..सफ़ाई का इतना ही चर्चा हो रही हैं बेतिया प्रशासन की तरफ से और नगर परिषद से.. 


एक सन्नी  नामक युवक ने हमें एक तस्वीर भेजी, जो किशुन बाग़ चौक की हैं। 

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आप तस्वीर में देख सकते हैं के ये चौक का हाल हैं, उन व्यक्ति का कहना था के ये सालो से ऐसे ही रहता हैं ना ही डस्टबिन की व्यस्था हैं, ना ही कूड़ा का उठाव होता हैं, ना ही घर घर आ कर कूड़ा उठाओ होता हैं जैसे के आजकल बेतिया के ज्यादातर वार्डों में होता रहा हैं। और मुझे आश्चर्य तब हुआ जब पता चला के ये वार्ड नो14 हैं और इसके जो वर्तमान वार्ड पार्षद हैं वो लगभग 7साल बेतिया के सभापति भी रह चुके हैं। और ये उनके वार्ड का मुख्य चौक हैं, 

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गंदगी इतनी के वहाँ खड़ा रहना मुश्किल रहता हैं। और इस पर आज तक ना ही नगर परिषद ने ठोस कदम उठाया हैं ना ही वर्तमान सभापति ने जो बेतिया को हर तरफ से गंदगी मुक्त करने की संकल्प ली हैं।

एक पल को सब छोड़ देते हैं, पर आस्था की जगह कहें जाने वाली उत्तरवारी पोखरा का हाल बद से बत्तर दिखता हैं, कल एक सज्जन ने एक तस्वीर डाली थी, (दुर्भाग्य से अभी मिली नहीं) उस तस्वीर में एक युवक खड़े होकर उत्तरवारी पोखरा में मूत्रविसर्जन कर रहा था..साल में दिन के हिसाब से सजाया जाता हैं उसको और बाकी दिनों में गंदे नाले जैसा हाल बना रहता हैं.. आसपास के सारे कूड़े कचड़े उसी में फेंका जाता हैं, जिसपर ना वहां के वार्ड पार्षद का ध्यान रहता हैं, ना ही नगर परिषद का हाल में हि महापर्व छठ बिता हैं, तब संत घाट की सफाई व्यस्था ऐसी थी की एक तिनका भी गिरा नजर नहीं आ रहा था..
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और छठ पूजा बिता तो गंदगी का जैसे अम्बार लगा हुआ हैं..छठ पूजा के वक़्त का गंदगी अभी तक सफाई नहीं हुई, कुछ दूसरे ग्रहों के वासी संत घाट की सीढ़ियों पर आकर मल-मूत्र त्याग क़रके और नजारा भयावक बना दिए हैं, छठ के वक़्त में लाखो खर्च कर के जो सजावट की जाती हैं, गर महीने 2महीने पर हज़ारो खर्च कर देखभाल होती तो अच्छा होता..पर इस पर भी नगर परिषद का कोई नजर नहीं जाता और यहीं हाल सागर पोखरा का मिलेगा और हरिवाटिका पोखरा, दुर्गा बाग़ मंदिर का..

क्या आप जानते हैं??
★ क्या आपको पता हैं प्रतिदिन बेतिया की सफाई पर 1लाख30हज़ार रुपया खर्च होता हैं।
★ बेतिया के 39वार्डों के हर पार्षद के पास कूड़ा उठाने के लिए छोटी ट्रैक्टर दी गयी हैं जिनमे से बहुत सारे पार्षद उसको व्यक्तिगत प्रयोग के लिए उपयोग करते हैं।

★ बेतिया के 39वार्डो की सफाई के लिए 307 सफाईकर्मी नियुक्त हैं। जिनमें से कुछ ही वार्डो के दीखते हैं। मेरे वार्ड में तो पर्व से लेकर पर्व में ही दिखते हैं।

★ बेतिया के प्रति वार्ड के लिए 2 फॉगिंग मशीन हैं मतलब 39वार्डो के लिए 78 फॉगिंग मशीन हैं। फिर भी साल में 1 दफा भी नगर परिषद छिड़काव नहीं कराता भले हम मच्छर से मरे ही क्यूँ ना।

★ डेंगू से बचने के लिए सरकार ने हर शहर में ये सुविधा दी हैं जिसमे एक अलग वार्ड हो डेंगू पीड़ितों के लिए पर बेतिया में ऐसा कोई वार्ड नहीं हैं

★ पिछले कुछ दिनों में 3 डेंगू पीड़ितों की पुष्टि हो चुकी हैं, प्रशासन ने अलर्ट किया हैं क्योंकि मछरों के काटने से 8 तरीको के बीमारियाँ होती हैं फिर भी हमारे नगर परिषद इसको हल्के में ले रहा हैं..



रोज डेढ़ लाख रूपये की नगर पालिका सफाई कराती हैं तो आखिर बेतिया में सफाई हैं कहाँ???


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