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बौद्ध स्थल का दीदार करने फ्रांस से पैदल बगहा पहुंचा युवक, थाईलैंड से आये 130

बगहा: फ्रांस का एक युवक पैदल यात्रा कर बुधवार की देर शाम में बगहा पहुंच गया। पेशे से इंजीनियर हरमन पैदल ही कई देशों की यात्रा करते हुए नेपाल के रास्ते बगहा पहुंचा।

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बगहा के आदर्श कम्पलेक्श स्थित एक होटल में कमरा लेने के लिए पहुंचा तो विदेशी नागरिक को देख होटल के मैनेजर ने कमरा देने से पूर्व पुलिस को सूचित किया। नगर थानाध्यक्ष मो अयूब के नेतृत्व में पुलिस आई और विदेशी नागरिक को थाने ले गई। चूंकि पुलिस थाने ले गई जरूर। लेकिन उसके पासपोर्ट आदि की जांच के बाद थाने में ही युवक के आवासन की व्यवस्था की गई।


पूरी तरह से थाने परिसर में आराम से गुजारने के बाद विदेशी युवक पुन: नेपाल के रास्ते वापस हो गया। थानाध्यक्ष ने बताया कि बौद्ध स्थलों का भ्रमण करने के लिए फ्रांस का वह युवक निकला है। चूंकि उसके पास पैसे भी नहीं हैं। इस वजह से होटल में कमरा मिलने में दिक्कत हो रही थी। पाकिस्तान के बार्डर अटारी से नेपाल लुम्बनी होते हुए बगहा पहुंचा है।

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हरमन ने बताया कि इसके पिता पास्कल भीम फ्रांस के एक गांव के निवासी है। हरमन की एक बहन और एक भाई भी है। पूरा परिवार बौद्ध धर्म को मानता है। हरमन को बचपन से ही बौद्ध के चारों धाम लुम्बनी, बौध गया, सारनाथ राजगीर, कुशीनगर के बारे में जानने की जिज्ञासा थी। जैसे ही इंजीनियरिंग की परीक्षा समाप्त हुई। घर वालों को अपना निर्णय सुनाया। घर पर पैसा की कमी देखते हुए वह पैदल ही निकलने का निर्णय लिया। 17 जुलाई को वह ईरान, युरोप, पाकिस्तान होते हुए नेपाल के रास्ते बगहा पहुंचा। बुधवार को हरमन ने भारत को ग्रेट कंट्री बताते हुए कहा कि यहां के थानाध्यक्ष सहित सभी लोग बहुत अच्छे है। इनका प्यार और सहयोग जीवन भर याद रहेगा। मामले में थानाध्यक्ष मो. अयूब ने बताया कि जांच में पता चला कि यह बौध धर्म के अनुयायी है।

थाईलैंड के 130 पर्यटक नंदनगढ़ पहुंचे
थाईलैंड देश के 130 पर्यटक वैशाली से पैदल चलकर गुरुवार को लौरिया के नंदनगढ़ पहुंचे । जब वे लौरिया में पहुंचे तो उनके चाल में गजब की फूर्ति आ गई और उनमें जल्द से जल्द नंदनगढ़ पहुंचकर अपने प्रभु भगवान का जो दीदार करना था।

इधर गढ़ पर पहुंचते ही सारे पर्यटक सबसे पहले हाथ जोडकर बुद्ध का स्मरण किया । उसके बाद फ्रेश होकर नंदनगढ़ की 5 बार परिक्रमा की , उसके बाद करीब दो घंटे तक बुद्धकी अपने देश के विधि विधान के साथ पूजा याचना की । पूजा के दौरान ही कई बुद्ध के अनुयायी कभी नाचते थे ,तो कभी रोते थे । नाचते ,रोते, प्रार्थना करने का भी ढंग इनका अलग था । ऐसा लगता था कि ये बौद्धिष्ट व मयंक को बहुत बड़ी चीज मिल गई हो । उनका शायद भगवा बुद्ध से साक्षात साक्षात्कार हो गया हो । सैकड़ों बच्चों को काजू, फल , मिठाई बिस्किट आदि प्रसाद के रूप में दे रहे थे ।

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इस बावत थाईलैंड के मयंक जूनटू पामा ने द्विभाषीय संतोष जायसवाल के माध्यम से बताया कि हमसब बहुत दिनों से भारत आकर लौरिया में भगवान बुद्ध का दर्शन करना चाहते थे।


जब उनका बुलावा आया गया तो बिना समय गवाएँ 130 बौद्दिष्टों के साथ लौरिया आए । हमसब वैशाली से यहाँ दो दिनों में पैदल चलकर पहुँच गए । हमने प्रण किया था कि पैदल ही चलकर उनका दर्शन करेंगे और बुद्ध ने हमारी सुन ली , हमें शक्ति दी ।

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