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सरैया मन बनेगा बिहार का पहला नेशनल पार्क, पढ़े पूरी ख़बर..

बेतिया। राज्य के प्रथम अधिसूचित उदयपुर वनाश्रयी में वन्य प्राणियों की सुरक्षा और उनके जीवन के लिए घातक बने शिकारियों पर नजर रखने के लिए मंझरिया में एंटी पोचिंग कैंप बनाए जाएंगे। 

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विभाग ने इसकी स्वीकृति के लिए सरकार को वार्षिक कार्ययोजना भेज चुकी है। सबकुछ ठिकठाक रहा, तो वार्षिक कार्ययेजना की स्वीकृति के साथ ही इस पर काम शुरु कर दिया जाएगा। 

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नेशनल पार्क के अलावा इसकी सुविधा पाने वाला यह सूबे का पहला वनाश्रणी हो जाएगा। एंटी पोचिंग कैंप वनाश्रणी के मंझरिया हिस्से में बनाया जाएगा। यह वह हिस्सा है, जहां से आस पास गांव से होकर शिकारियों के आने की संभावना बनी रहती है। यह हिस्सा अब तक असुरक्षित था, जिसे प्रमुखता से इस बार लिया गया है। इसके निर्माण से उदयपुर वन प्राणि आश्रणी की सुरक्षा पूरी तरह बढ़ जाएगी। 

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वन्य प्राणि आश्रणी में ईको टूरिज्म विकसित करने के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जहां से पर्यटकों के आने के लिए जिला मुख्यालय से होकर प्रवेश द्वार बनाया गया है। जबकि मंझरिया का हिस्सा खुला हुआ था। 

जहां से किसी का आना भी आसान था। लेकिन एंटी पो¨चग कैंप स्थापित हो जाने के बाद इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एंटी पो¨चग कैंप में आधा दर्जन वन कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की जानी है। उनकी डयूटी रोसटर के अनुसार लगाई जाएगी। उन्हें इस क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने एवं वन्य प्राणियों की देखभाल करने के लिए यहां रखा जाएगा। रात्रि में निगरानी के लिए उन्हें नाइट विजय कैमरा भी मुहैया कराया जाएगा। यहां प्रतिनियुक्त वन कर्मी यहां की गतिविधियों के बारे में विभाग के अलावा अधिकारियों को भी सूचित करेंगे। 


एंटी पो¨चग कैंप में वे सारी सुविधाएं मुहैया करा दी जाएंगी, जिसकी जरूरत यहां रहने वाले वन्य कर्मियों को होगी। करीब 8.5 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत इस वनाश्रणी में मुख्य रूप से हिरण, चितल, नीलगाय, जंगली सुअर सहित कई छोटे-छोटे वन्य प्राणी हैं। 

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लेकिन जंगल के बीच में स्थित सरैयामन के नाम से जाना जाने वाला मन काफी मशहूर है। यहां पाई जाने वाली मछलियां अन्य मछलियों से भिन्न है। आजकल यह मन प्रवासी विदेशी पक्षियों का बसेरा बना हुआ है। विभिन्न प्रजाती की पक्षी यहां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इनकी सुरक्षा के लिए भी विभाग हमेशा संवेदनशील रहता है। यहां मछलियों के पकड़ने पर भी पूरी तरह रोक है। इन दिनों पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर वन्य प्राणियों की सुरक्षा भी काफी महत्व रख रहा है। जीव जगत में पेड़ पौधों एवं वन्य जीवों की साम्यता भी पर्यावरण के लिए उतना ही महत्व रखता है। यहां पाए जाने वाले विभिन्न प्रजातियों के पेड़ पौधों के अध्ययन करने के लिए पिछले वर्ष बोटैनिनक सर्वे ऑफ इंडिया की टीम 37 प्रजातियों का चयन किया है।

अब सरैयामन में पक्षियों का दीदार करेंगे सैलानी

बेतिया: अब उदयपुर जंगल को सैलानियों के लिए खोल दिया गया है। यहां आने वाले सैलानी सरैयामन पक्षी विहार की खूबसूरत चिड़ियों का दीदार कर सकेंगे। 

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इस वनाश्रणी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। इसकी जानकारी देते हुए वन प्रमंडल पदाधिकारी हेमंत पाटिल ने बताया कि अब तक यह वनाश्रणी पर्यटाकों के लिए बंद था। लेकिन पर्यटक इसके अंदर चार पहिया वाहन से नहीं जा सकेंगे। इसके लिए वाहनों को नाका नम्बर एक या नाका नम्बर दो पर ही छोड़कर प्रवेश करना होगा। नाका नम्बर दो से जाने पर सरैयामन की दूरी काफी कम है। 

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सरैयामन के किनारे बने भवन के पास ही एक वाच टावर(भ्यू प्वाइंट) का निर्माण कराया गया है। जहां से सैलानी सरैयामन में कलरव करती विदेशी चिड़ियों को देखे सकते हैं। डीएफओ श्री पाटिल ने बताया कि जंगल के अंदर वन्य प्राणियों के हित को देखते हुए इस क्षेत्र में मोटरयान के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। वाहनों के प्रवेश से एक ओर जहां प्रदूषण फैलेगा, तो दूसरी ओर वन्य प्राणियों के प्रजनन पर भी प्रतिकूल असर करेगा। इस समय ग्रीन लैंड व साईबेरिया से यहां चिड़ियां आकर निवास कर रही हैं। यदि इस वातावरण में कोलाहन हुआ, तो चिड़ियों का यहां रहना मुश्किल हो जाएगा। प्रवाशी पक्षी इस मन में मार्च के पहले सप्ताह तक रहती हैं। इस बिच उनके लिए यहां प्रजनन का समय होता है। फिर बच्चों को लेकर अपने मूल प्रदेश को वापस लौट जाती हैं। बता दें कि पूर्व में बेतिया राज से तालूकात रखने वाला यह वनाश्रणी करीब 8.5 वर्ग किलोमीट में विस्तृत है। 

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जहां विभिन्न प्रजातियों के फ्लोरा एवं फाउना पाए जाते हैं। 

इस जंगल में पाए जाने वाले पुत्रजीवा नामक झाड़ी अत्यंत दुर्लभ है। इसका औषधीय महत्व अधिक है। उदयपुर वनाश्रणी जिला मुख्यालय बेतिया से करीब 7 किलोमीटर पर स्थित है। जहां सड़क मार्ग से जाया जा सकता है।


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