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बेतिया की सड़के आखिर कबतक रहेगी खून से लथपथ।।

बेतिया की सड़के आखिर कबतक रहेगी खून से लथपथ।। 1


बेतिया। जिले की सड़कें खून के छीटों से लाल होती जा रही है। आयेदिन हंसने खिलखिलाने वाली ¨जदगियां वाहनों के पहियों के आगे रौंदी जा रही है। आलम यह है कि अनफिट वाहनों का परिचालन धड़ल्ले से हो रहा है। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा वैसे लोगों को भुगतना पड़ रहा है जो कही से हादसों के लिए जिम्मेवार नहीं है। अगर दो साल के आकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो दो दर्जन से अधिक लोग तेज व अनियंत्रित वाहनों की रफ्तार के शिकार हो गए। दिसंबर 2016 व अब तक आधा दर्जन लोग दर्दनाक मौत के शिकार हो गए। इन हादसों की खास बात यह रही की इनमें से तीन घटनाएं छावनी और उसके आस पास हुई।10 फरवरी की रात बेतिया-नरकटियागंज मुख्य पथ में कुड़िया कोठी के पास मिर्जा टोली छावनी निवासी राजन कुमार की मौत भी वाहन की ठोकर लगने से हो गयी। वह सड़क के किनारे ठाकेर लगने से तड़पता रहा और अंतत: उसकी जान चली गयी। विभागीय पहल संदेह के घेरे में है। लोगो का मानना है कि खटारा और रिजेक्ट वाहन सड़कों पर दौड़ते रहते है। न उम्र की सीमा और न ही लाइसेंस की जरूरत कार, बाइक, या फिर भारी वाहन सड़कों पर चलती और दौड़ती रहती है। वो भी पूरे रफ्तार के साथ। भले ही सड़कें खून के छीटों से लाल होती रहे इसकी परवाह कोई नही कर रहा, न विभाग और न ही..।

अनफिट वाहनों की लंबी फेहरिस्त

जिले में अनफिट वाहनों की लंबी फेहरिस्त है। सड़कों पर हजारों अनफिट वाहन सरपट दौड़ लगा रहे। इनमें से वैसे वाहन भी है जिनके कागज की बात कौन करें खुद वाहन ही उस हालत में नही है जिन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा सकता है। बावजूद इसके सड़कों पर चिमनी की तरह धुआं फेंकते वाहन व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। सरकारी स्तर पर एक साल के अंदर महज छह सौ वाहनों को ही फिटनेस का सर्टिफिकेट दिया गया है। ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले की सड़कों पर कितने अनफिट वाहन दौड़ लगा रहे है।


पांच साल में 47 मौत, जिम्मेवार कौन


पिछले पांच साल के आकड़ों पर गौर करने पर रूह तक कांप जाती है। वर्ष 2013 से अब तक 47 लोग सड़क हादसों में अपनी अपनी जान गंवा बैठे हैं। इनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे सड़क के किनारे से होकर गुजर रहे थे या फिर अपनी अपनी बाइक पर सवार होकर गंतव्य की ओर जा रहे थे। दिसंबर 2016 से लेकर छावनी और उसके आस पास तीन ऐसी घटनाएं हुई जिससे पूरे जिले के लोग मर्माहत हो गए। इन मौतों के बाद लोगों का गुस्सा भी सड़कों पर फूटा लेकिन स्थिति अब भी जस का तस है।


तीन माह के अंदर की प्रमुख घटनाएं

15 दिसंबर 2016 – छावनी में ट्रक से कुचल कर कमलनाथनगर निवासी अमित कुमार वर्णवाल की मौत

21 दिसंबर 2016 – छावनी के पास ही पंप के समीप वीरू कुमार की मौत

07 जनवरी 2017 – लौरिया के कंधवलिया में ट्रक व ट्रैक्टर की भिड़ंत में नेयाजुल अंसारी व आमिर अंसारी का मौत

16 जनवरी 2017 – संत घाट निवासी अधिवक्ता यदुनंदन कुशवाहा की कार का फाटक से टकराने पर मौत

27 जनवरी 2017 – वाल्मिकीनगर क रोहुआ टोला के पास एसएसबी की ट्रक से उत्तरप्रदेश के महाराजगंज निवासी नागेन्द्र शर्मा की मौत, उसी दिन वाल्मिकीनगर – बगहा मुख्य पथ में टेम्पो में अज्ञात वाहन की ठोकर लगने से नौरंगिया निवासी रामवृक्ष महतो की मौत

10 फरवरी – 2017 बेतिया नरकटियागंज मुख्य पथ में कुड़िया कोठी के पास मिर्जा ओली निवासी राजेन्द्र बैठा के पुत्र राजन कुमार की अज्ञात वाहन की ठोकर से मौत

सड़कों पर अनफिट वाहनों का प्रचलन बंद हो इसके लिए विभागीय स्तर पर वाहनों की जांच पड़ताल की जा रही है। एक साल के अंदर करीब छह सौ वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट दिया गया है।

अरुण कुमार
एमवीआइ, बेतिया

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