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दहेज़ के लोभियों ने छीनी कितने घरों की खुशियां

दहेज़ के लोभियों ने छीनी कितने घरों की खुशियां 1


बेतिया: दहेज रूपी आग में जिले का कोना कोना धधक रहा है। इस आग से कई घरों की खुशियां और उम्मीदें पल भर में राख होती चली जा रही है। बेटी से बहू बनने का सपना उस वक्त तार तार हो जाता है जब बेटियों की लाश सड़ी ओर जली हुई हालत में सड़कों के किनारे मिलती है। एक ही दिन दो बेटियों की लाश मिलने से यह साफ हो गया कि बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं अभियान को स्वीकार करने में जिले की स्थिति कितनी खराब है। हाल के दिनों में जिले में जिस कदर दहेज हत्या का ग्राफ बढ़ा है उससे हसीन सपने लिए ससुराल का रूख करनेवाली बेटियों के बाबुल का कलेजा तक किसी अनहोनी को लेकर कांप उठता है। ठीक वैसे ही जैसे गोबरौरा के सिपाही पटेल और साठी बसंतपुर के अखिलेश मिश्र का कलेजा कांप उठा था। बेटी को विदा करते वक्त ही उन्हे इस बात का भान हो गया था कि शादी तो हो गई लेकिन आगे क्या होगा राम जाने। हुआ भी वही जिसका अनुमान था। इनमें से एक के बेटी की गला दबा कर हत्या तो दूसरे की जला कर हत्या कर दी गई। ऐसे कई मामले हैं जो जिले के विभिन्न थानों के एफआइआर में दर्ज हैं। दहेज प्रथा का अंत ही बेटियों की सुरक्षा का वाहक बन सकता है। इसके लिए सामाजिक स्तर पर बदलाव और सख्त कानून की मांग भी अब उठने लगी है। अगर इस पर रोक नही लगी तो आने वाले दिनों में जिस प्रकार बेटियों के साथ साथ मां बाप के अरमानों का कत्ल हो रहा है दहेज प्रथा की आग में सब कुछ जल कर खाक हो जाएगा।

दहेज उत्पीड़न की शिकार महिलाएं एक नजर में
21 फरवरी- श्रीनगर पुजहां की नेहा कुमारी को जहर की सुई देकर मौत के घाट उतार दिया गया..

17 मार्च – साठी बसंतपुर के अखिलेश मिश्र की बेटी खुशबू की गला दबा कर हत्या..


22 मार्च – बेतिया के पदमा नगर निवासी पम्मी देवी की गला दबा कर हत्या..


3 अप्रैल – बलुआ योगापट्टी की नेहा देवी की जला कर हत्या, सड़क किनारे मिली लाश..


3 अप्रैल – इनरवा थाना क्षेत्र में खेत में मिली विवाहित अज्ञात महिला की लाश..

                     
दहेज़ के लोभियों ने छीनी कितने घरों की खुशियां 2

                                            

  शराबबंदी के बाद दहेजबंदी की भी उठने लगी मांग
         
सरकार के शराबबंदी अभियान की सफलता को देखते हुए अब दहेज बंदी की भी मांग उठने लगी है। कई सामाजिक संगठनों ने इस दिशा में कार्य करना भी शुरू कर दिया है। महिलाएं गोलबंद होने लगी है और सोशल मीडिया के माध्यम से दहेज बंदी की मांग सूबे के मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जा रही है। फेसबूक, टवीटर और वाट्स ऐप के जरिए दहेज को लेकर होनेवाली मौतों पर तंज कसा जा रहा है। महिला किसान व सामाजिक कार्यकर्ता शीला वर्मा, समाजसेवी शबनम ¨सह, जनता दल यू की वरीय नेत्री सुरैया शहाब, नरकटियागंज से भाजपा की प्रत्याशी रही रेणु देवी व जूही यास्मीन जैसी महिलाएं दहेज बंदी को लेकर सक्रिय हैं। वही सामाजिक कार्यो से जुड़े युवा भी दहेज बंदी को लेकर आवाज बुलंद करने लगे हैं। जय माता दी लंगर कमेटी के सदस्य दिनेश जायसवाल, राजेश जायसवाल, मोनु कुमार, भोला कुमार जैसे युवा दहेज को सामाजिक कोढ़ बताते हुए लोगो से दहेज नहीं लेने की अपील तक कर रहे हैं। इसके लिए उनलोगों ने पहल शुरू कर दी है। समाज के सभी लोगों को इस दिशा में आगे आने की जरूरत है, तब ही अपना समाज दहेजमुक्त हो सकता है। वहीं भाजपा नेत्री रेणु देवी का कहना है कि राज्य सरकार नारी सशक्तीकरण की बात करती है तो उसने जिस प्रकार प्रदेश को शराब मुक्त बनाया है उसी तरह प्रदेश को दहेज मुक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए। इसके लिए दहेज पर रोकथाम संबंधी कानून की समीक्षा कर उसे उपयोगी व सख्त बनाने की जरूरत है, ताकि दहेज पूरे समाज के लिए अभिशाप हो जाए।

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