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चम्पारण सत्याग्रह के 100वर्ष होने पर सत्याग्रह की पूरी दास्ताँ देखें

चम्पारण सत्याग्रह के 100वर्ष होने पर सत्याग्रह की पूरी दास्ताँ देखें 1

                                   चम्पारण सत्याग्रह के 100साल पुरे होने पर चम्पारण सहित पुरे देश में इसकी चर्चा हैं।
अंग्रेजों के खिलाफ गाँधी जी द्वारा की गयी सत्याग्रह आँदोलन के 100वर्ष पुरे होने में बस 4दिन और हैं।
                            और इस गर्वशील सत्याग्रह की एक झलक बिहार दिवस में लाइट्स के द्वारा दिखाया गया था। जिसे आप निचे के विडियो में देख सकते हैं।।



गांधी जी की यात्रा बेतिया में, पढ़े..

बेतिया: अप्रैल 1917 ई० को गाँधी जी मोतिहारी पहुचे। अंग्रेजो को उनका यहाँ आना अच्छा नहीं लगा और उनलोगो ने इसका विरोध भी किया और उनपर नयायालय में केस दर्ज कराया। गाँधी जी ने भी मोतिहारी के जिला पदाधिकारी के पास लिखा।आखिरकार 20 अप्रैल को सरकार ने उनके खिलाफ दर्ज हुई केस को ख़ारिज किया और उन्हें यहाँ के जिला कलेक्टर को आदेश दिया की गाँधीजी के जरुरत के लिए उनके साथ जाए ताकि उन्हें कोई दिक्कत न हों।” सत्याग्रह आन्दोलन ” की पहली जीत यही थी और हो भी क्यों ना।
क्योकि भारत की आज़ादी की पहली नीव चम्पारण में रखीं गयी थी और “सत्याग्रह आन्दोलन ” की शुरुवात चम्पारण के ही बेतिया से शुरू हूई थी। गाँधीजी ने बेतिया के भितिहरवा में कई दिन बिताये और यहाँ के सारे लोगो ने उनका साथ दिया और वही जगह पे आज भितिहरवा आश्रम है।


22 अप्रैल को गाँधीजी बेतिया पहुचे यहाँ उनका भव्य स्वागत हुवा हजारो की संख्या में लोग स्टेशन पे पहुचे थे जिनमे स्कूल के बच्चे, किसान , पास के गाँव से आये लोग थे।
गाँधीजी बेतिया के हजारीमल धर्मशाला में रुके जहाँ पे सभी आन्दोलनकारियो के साथ उनकी मीटिंग हुई।उसके बाद उनके साथ राजकुमार शुक्ला और वकील ब्रज किशोर प्रसाद जुड़े। फिर वे लौकरिया के लिए निकले उसके बाद वे रामनवमी प्रसाद के साथ सिंगाछापर गए। 27 अप्रैल को वे नरकटिया गंज गए। अगले दिन वे लोग पैदल साठी न्यायालय पहुचे।उसके बाद वे मोतिहारी पहुचे और उन्हें तुर्कौलिया के ओलहन कोठी के आग लगने के बारे में मालूम हूई और उन्होंने अपनी जाँच की सुचना पटना नयायालय में पहुचाई।फिर वो बेतिया लौट आए। पूरा पढ़े..


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