चंपारण के लाल आशुतोष ने किया कमाल, माया नगरी मुंबई में लहरा रहा सफलता का परचम..

चंपारण-  सोनी टी.वी पर धारावाहिक ‘पृथ्वी वल्लभ’ प्रसारित हो रहा है. करीब सौ करोड़ से ज्यादा की लागत से बने इस सिरियल के बारे में कहा जा रहा है कि पिछले साल रिलीज फिल्म बाहुबली से भी ज्यादा इतिहास और रहस्य इसमें है.

चंपारण के लाल आशुतोष ने किया कमाल, माया नगरी मुंबई में लहरा रहा सफलता का परचम.. 1

इस धारावाहिक में कथा लेखन का काम चंपारण के होनहार लाल आशुतोष कुमार ने किया है. शिक्षक पिता चन्देश्वर प्रसाद यादव और माता सीता देवी के पुत्र आशुतोष का जन्म वर्ष 1995 में पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर प्रखंड के पचपोखरिया गांव में हुआ था. बचपन से ही कला के क्षेत्र में रूझान रखने वाले आशुतोष ने अपनी बारहवीं तक की पढाई मोतिहारी से ही की है.इसके बाद अपने सपने को पूरा करने के लिए 2013 में वे मुंबई चले गये. पढ़ाई जारी रखते हुए मुंबई के संत जेवियर्स काॅलेज से मास काॅम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री ली.
डेली बिहार न्यूज से खास बातचीत में आशुतोष कुमार बताते हैं कि– एक तरफ मध्यम वर्गीय परिवार, जिसमें मां-बाप का सपना होता है कि बेटा पढ-लिख कर बैंक-रेलवे में नौकरी करे या फिर डाॅक्टर- इंजीनियर बने. इस सोच से परिवार वालों को निकालना थोड़ा मुश्किल भरा रहा. वहीं दूसरी तरफ इसमें कोई दो राय नहीं की मुंबई के बाॅलीवुड इंडस्ट्री में काम कर रहे लोगों के रिश्तेदार होने या उनकी सिफारिश से ही काम मिल पाता है.लेकिन आपमें मेहनत करने की क्षमता, लगन और धैर्य है तो मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता.
आशुतोष बताते हैं कि शुरुआत में मुझे भी काम मिलने में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था. कथा लेखन का काम मिलने के बाद लगभग दो वर्षों से इस फिल्ड में काम कर रहा हूं. जिसमें से एक धारावाहिक पृथ्वी वल्लभ प्रसारित हो रहा है. इसके अलावे दो-तीन और कहानियों पर भी काम कर चल रहा है, जो की आने वाले समय में दर्शकों को देखने को मिलेगा.
जहां तक संघर्ष की बात है तो मैंने भी की है.भगवान और परिवार वालों की कृपा से कभी रेलवे प्लेटफार्म या फुटपाथ पर सोने जैसी नौबत नहीं आई.पृथ्वी वल्लभ धारावाहिक में दर्शकों को दो प्रांतों के राज घराने के बीच दुश्मनी, प्रेम, चाल और लड़ाई इत्यादि देखने को मिलेगा. इससे पहले किसी और ने इतनी रोमांचक कहानी नहीं दिखाई होगी.यह कहानी काफी अलग है. दर्शक इसके एक कड़ी देखने के बाद खुद दुसरी कड़ी का इंतजार करेंगे.
चंपारण के लाल आशुतोष ने अपने जिले और राज्य भर के अभिभावकों से एक गुजारिश करते हुए कहा कि अपने बच्चों को कैरियर चुनने की आजादी दें. एक फिल्म का डायलाॅग है “काबिल बनो, काबिलियत खुद झख मार के पीछे आयेगी”. आदमी काबिल तभी बन सकता है, जब उस क्षेत्र में आदमी की रूचि हो. मेरा मानना है कि अपने रूचि के पेशे में जाने से पैसा और शोहरत अपने आप झख मार के पीछे आती है.
एक सवाल के जबाब में आशुतोष ने कहा कि
भविष्य में लेखन के क्षेत्र में चंपारण और बिहार के होनहार युवाओं के सहयोग के लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगे.

स्रोत- डेली बिहार न्यूज़

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